उम्मीद का सवेरा बन

तुम्हारी पलकों में हर पल,
ख्वाब बन रहूँ !
तुम्हारे ख्यालो के घेरे में,
एहसास सी पलू !
जब का रात का अँधेरा,
हर तरफ हो फैला,
मैं रौशनी की किरण बन,
तेरी राह में जलू !
गुम हो मंजिले,
रास्तों में कही,
उम्मीद का सवेरा बन,
तेरे संग-संग चलू !!

– श्रेया आनंद
(10th Nov 2010)

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