ख़ामोशी

कभी सुन मेरी ख़ामोशी को..
कई राज गहरे है
कभी सुन मेरी धडकनों को
कितने सपने सुनहरे है
कभी हाथ मेरा थाम कर
कुछ दूर मेरे साथ चल
फिर सुन कुछ अनकही कुछ बातों को
कितने लफ्ज बिखरे है।।।

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