समझा था जिसे अपना ….

समझा था जिसे अपना पराया वो हो गया,
साया बना था धूप में वो हमे ही जला गया !!

कुछ दूर तक हमारे साथ चला था,
राहों मे अनजानी वो हमें ही तन्हा छोड गया !!

जिसकी खुशी की खातिर हमने सब कुछ लुटा दिया,
जिंदगी मे हमारी वो ही जहर भर गया !!

4 May 2013

8 Comments

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' गुरचरन मेह्ता 05/05/2013
    • Muskaan 06/05/2013
  2. Yashoda agrawal 05/05/2013
  3. दिगंबर 08/05/2013
  4. Deepak Nambiar Deepak Nambiar 08/05/2013
    • Muskaan 09/05/2013
  5. Tejinder 16/05/2013
    • Muskaan 16/05/2013

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