दर्द की नींद सोना कैसा

शिकवे तो होते है उनसे जिनका वजूद हो खुद के लिये,
जिन्हे भुला चुके उन्हे कोसना कैसा !!

दरवाजे जो तुमने खुद बनाये अपने धोखे से,
फिर उन्हे खोलना कैसा !!

खुश है हम अपने बनकर,
फिर दुबारा तेरे बनकर रोना कैसा !!

साथ चलने का हुनर तो तुमने सीखा ही नही,
फिर अकेले चलने का मलाल कैसा !!

कभी सुनाई दी ही नही तुम्हे मेरे दिल की सदा ,
फिर आज उन्ही लव्जो के जवाब का दिखावा कैसा !!

ऍ जिन्दगी तेरा शुक्रिया मुझे नींद से उठाने का,
फिर दुबारा दर्द की नींद सोना कैसा !!

4 May 2013

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