आतंकवाद

आतंक एक प्रवृति का नाम,जो जम गया देशों में तमाम

है न इसकी कोई जाति ,है न इसका कोई ईमान

आतंकबाद हुआ है तबसे ,महाभारत का दौर था जबसे

ऐसी ही कुछ बाते हुई थी ,द्वेष बदला क्रूरता व छल से

उत्तरा के गर्भस्थ शिशु को ,ब्रह्मास्त्र से बचाया कृष्ण ने उसको

ये था कृत्य कलंक भरा ,चीत्कार उठा था उर में सबको

इस कदर आतंक है बदला ,दृश्य सहित विवाद है बदला

भोले –भाले चेहरे वाले ,लड़कों ने विषाद  है बदला

मंदिर-मस्जिद तोड़ ही देता ,भावनाओं की हत्या करता

ब्यक्ति समाज जीवन के क्षण,तोड़ –मरोड़ के रख ही देता

किस रूप में कहाँ पर होगा,स्वस्थ या बीमार सा होगा

समाज के अंदर वो कुछ ऐसा ,घृणित कार्य करता ही होगा

उसकी हिम्मत उसकी बुद्धि ,शक-संदेह से परे ही होती

लेकिन निर्बल मानसिकता ,निर्दयता का परिचय देती

धन-लोलुपता उसकी आशा, फंसकर जीता बेकारी हताशा

बुन-षडयंत्र का ताना-बना, कर लेता हत्या और हिंसा

आतंकबाद का ध्येय है जारी, साधन अपार ऐश्वर्य है जारी

ये विनाश करते ही रहेंगे ,इसकी दुष्साहस है जारी

अनगिनत राक्षस को मारा, राम कृष्ण सा वीर हमारा

शोर्य –पराक्रम भरा था उनमें ,जिसने रोशन किया अँधेरा

प्रकृति का अपना है ढंग ,बच नहीं सकता ये उदंड

        है विधि का विधान सुन्दर जो आदि है वो होगा अंत  

                                 

भारती दास 

 

                

2 Comments

  1. Bibhooti Kumar 04/05/2013
  2. Sunil Kumar Das 04/05/2013

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