दूध और चाय

एक बार दूध और चाय में जब बहस हो गई तो दूध ने चाय को जो कुछ कहा वह एक
रचना के माध्यम से आपके सामने प्रस्तुत है :

तू लन्दन की है मेमसाब – और मैं हूँ गाँव का छोरा
तू मेम होकर भी काली – और मैं हूँ गोरा गोरा
तेरे भाई तुझको लेकर – आये थे करने बिजनस
तू फ़ैल गई चारों तरफ – समां गई रे नस-नस

200 साल के बाद हमने – लात थी उनको मारी
पर जाते जाते दे गए – वे एक बड़ी बीमारी
तेरा गली-गली में ठेला – पत्ती ठोकी रेलम पेला
तेरी आदत जो पड़ जाए – फक्कड़ बने गुरु या चेला

रात को तुझको पीलो – तो नींद निकट नहीं आती
और मेरा घूंट लगा लो – तो थपकी दे नींद सुलाती
मैं बच्चों की पहली पसंद हूँ – मैं हूँ जग से निराला
तू विष के जैसी लगती – मैं हूँ अमृत का प्याला

मैं पंजाब का मक्खन हूँ – और हरियाणा की छाछ
मैं दिल्ली की रबड़ी हूँ – महाराष्ट्र का हर्षोल्लास
मैं गुजराती श्रीखंड हूँ – पूरे देश का खासमखास
तू आसाम का काला जादू – सभी का करती नाश

मेरे पोषक तत्वों से त्वचा – खिली खिली सी रहती
जो ढीली-ढाली सुस्त है सबसे – मिली मिली सी रहती
दांतों, और हड्डियों को भी – ताकत देता मैं पुरी
बीमारियों से बना कर रखता – मैं चार कदम की दूरी

अरे! कुछ तो बता दे ऐसा – जो कोई गुण हो तुझमें
और बतलाता हूँ, क्या-क्या फर्क है तुझमें-मुझमें
खट्टा तुझमें लग जाए – तो झट से तू फट जाए
मुझमें खट्टा मिल जाए – तो स्वाद दही बन जाए

उसके बाद मैं बन कर लस्सी – गर्मी दूर भगाता
तू भी मुझको पी सकती तो – तेरा दूर भरम हो जाता
मुझको पीकर ही पहलवान भी अपनी देह बनाते
दारा सिंह हो या हो सल्लू – सब ताकत मुझसे पाते

तुझमें ताकत का नामोनिशाँ – कहीं नहीं है दूर-दूर
मैं ही आयरन, मैं ही कैल्शियम – हूँ ताकत से भरपूर
गर्भवती महिलाएं – जितना भी पाउडर खा लें
डाक्टर कभी नहीं कहते – ज़रा चाय में इसे मिला लें

मुझको पीने से परिवार में – बढ जाती है मिठास
तंग न करे बहू जो दे दे- सास को दूध गिलास
मेरे सहारे पलते हैं – दुनिया के सारे बच्चे
आचार-विचार शुद्ध होते – मन के बनते सच्चे

तेरा जो सेवन करता – बीमार बना रहता है
मेरा जो सेवन करता है – सदा जवान रहता है
मैं आँखों को रोशनी देता – तू आँखों को छीने
डूब गए कई लोग जो तुझ पर – पूरा भरोसा कीने

मैं बुद्धि का भण्डार – तू अक्ल की है रे दुश्मन
तुझको पीकर तेरे जैसा – हो जाए सबका तन-मन
तू कुछ नहीं है सामने मेरे – तेरी क्या औकात है
सब पीकर मुझको बोलें ये – वाह वाह क्या बात है.
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त्रुटि हेतु क्षमा प्रार्थी – गुरचरन मेह्ता

 

 

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