ये बहुत अच्छा किया

चेहरे पे चेहरा लगाया     ये बहुत अच्छा किया

अन्धो को दर्पण दिखाया ये बहुत अच्छा किया ।

आप ही हैं न्याय की   दुनिया के सच्चे बादशाह

कातिलो को घर बुलाया   ये बहुत अच्छा किया ।

आदमी की खाल तक     खेंची है हन्टर से मगर

पत्थरों को सर झुकाया    ये बहुत अच्छा किया ।

दोस्ती पर जिनकी       हमको बहुत ही नाज था

पीठ मे खन्जर घुसाया     ये बहुत अच्छा किया ।

जो भी गद्दी पा गये           बस हांकते अपनी रहे

गीत बहरॉ को सुनाया      ये बहुत अच्छा किया  ।

जिसको सदा दी प्यार  से अजनबी वो बन गया

“दास” को दुशमन बनाया   ये बहुत अच्छा किया  ।

आपकी  मासुमियत    पर  जब हुआ कोई फिदा

रुप नागन का दिखाया       ये बहुत अच्छा किया  ।

शिवचरण दास

 

4 Comments

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' गुरचरन मेह्ता 03/05/2013
  2. Muskaan 03/05/2013
  3. Dharmendra Sharma 08/05/2013
  4. शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' Shubham Srivastava 18/06/2013

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