ज़िन्दगी का मोल

ज़िन्दगी का मोल
ज़िन्दगी का है नहीं कुछ मोल
हो सके तो प्रेम इसमें घोल |

मौसमों से माँग ले तू रंग कुछ न्यारे,
आसमाँ की चाँदनी से सुरमयी तारे,

रात-दिन फिर
ख़ुशबुओं में तौल|

दुख है जग में कि तू अव्वल बना फिरता,
और सबको हेय कह पागल बना फिरता,

है अहं की नाव
डावाँडोल |

रूप, दौलत, धन, भवन क्या काम के तेरे?
मित्र, रिश्ते, शोहरत बस नाम के तेरे,

मोह का संसार
सारा गोल |

उम्र की अंतिम घड़ी अब आ रही प्यारे,
साँस काया की रुकी अब जा रही प्यारे,

बोल दो मीठे
अरे! तू बोल |
♦♦♦
• रजनी मोरवाल,
सी-२०४, संगाथ प्लेटिना.
मोटेरा, अहमदाबाद -३८०००५
मो. ०९८२४१६०६१२

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  1. Tushar Raj Rastogi 02/05/2013

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