बाधाओं से जूझ जूझ कर बढ़ना अपना काम है

लक्ष्य प्राप्ति को निकल पड़े तो पथ में कहाँ विराम है ?
बाधाओं से जूझ – जूझ कर बढ़ना अपना काम है। ।

बाधाएं भी क्रम से आयें, हमें लक्ष्य से ये भटकायें।
पर सबका हल एक नहीं है, सोचें समझें फिर सुलझाएं
हर बाधा है एक परीक्षा, यह पथ का संग्राम है।
बाधाओं से जूझ – जूझ कर बढ़ना अपना काम है। ।

पहली बाधा स्वर्गलोक से, पर यह कभी विरुद्ध नहीं।
गुरुजन सा सम्मान इसे दो, इस बाधा से युद्ध नही।
इनका लो आशीष चलो फिर जहाँ तुम्हारा धाम है।
बाधाओं से जूझ – जूझ कर बढ़ना अपना काम है। ।

दूजी है पाताल लोक से, नष्ट इसे कर दो अविलम्ब।
यही रूप है अहंकार का, ईर्ष्या, लिप्सा लालच दम्भ।
दो बाधाएं पार हो चुकीं, पर चलना अविराम है।
बाधाओं से जूझ – जूझ कर बढ़ना अपना काम है। ।

अंतिम मृत्युलोक की बाधा, लक्ष्य निकट तब इसने साधा,
इसे करो न पूर्ण नष्ट तुम, केवल इसको मारो आधा।
सद्गुरु मिल जायेंगे तुमको, बस अब नहीं विराम है।
बाधाओं से जूझ – जूझ कर बढ़ना अपना काम है। ।

2 Comments

  1. Aakanksha 02/05/2013
  2. एकता श्रीवास्तव 15/05/2013

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