तेरे इश्क में नुक्सान देखें और क्या देखें नफा रे

जीना मरना था तेरे संग जो न करते तुम जफ़ा रे ।
तुम हम से हो नाराज या फिर खुद से ही हो खफा रे ।।

माना आपको अपना ओर आपको ही है पूजा,
जिन्दगी में कभी नहीं आये कोई दूजा,
दिल में बसी है सूरत तेरी, मूरत मेरे मन में,
दुनिया से लड़ता रहा मैं तेरे लिए ही जूझा,
तुम्हे रास्ते पे न ला सकी हाय मेरी वफ़ा रे ।
तुम हम से हो नाराज या फिर खुद से ही हो खफा रे ।।

तुमसे बढकर और नहीं कुछ मेरे लिए इस जग में,
सदा दिया साथ तुम्हारा हर पल में हर पग में,
क्या-क्या बतलायें तुम्हे हम और सजायें तुम्हारी,
दौड़ रहा प्यार तुम्हारा मेरी इस रग-रग में,
माफी देते-देते थके हम अब और कितनी दफा रे ।
तुम हम से हो नाराज या फिर खुद से ही हो खफा रे ।।

क्या हुआ संग मेरे ओर क्या हुआ रे कब कुछ,
तेरे बंधन में बंधकर मैं भूल गया रे सब कुछ,
तेरे ख्यालो में खोकर मैं कितनी रात न सोया,
तेरे सिवा कुछ याद नहीं है-याद नहीं रे अब कुछ,
भूली बिसरी यादें बना मेरी जिन्दगी का सफा रे ।
तुम हम से हो नाराज या फिर खुद से ही हो खफा रे ।।

मैं अब तक समझ न पाया ये हुस्न की माया,
बस इतना जानू पलटी इतरे प्यार ने मेरी काया,
कुछ मिलने की आशा अब मन में रही ना बाकी,
क्या सोचें प्यार तेरे  में क्या खोया ओर क्या पाया,
तेरे इश्क में नुक्सान देखें और क्या देखें नफा रे ।
तुम हम से हो नाराज या फिर खुद से ही हो खफा रे ।।

जीना मरना था तेरे संग जो न करते तुम जफ़ा रे ।
तुम हम से हो नाराज या फिर खुद से ही हो खफा रे ।।
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गुरचरन मेहता

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