वो मेरी उम्र का लड़का

वो मेरी उम्र का लड़का,
कभी पढ़ने नहीं जाता,

कभी कुछ लिख नहीं पाता;
वो मेरी उम्र का लड़का!!

१]-वो मेरी उम्र का लड़का-

मेरी गली के सामने,बाज़ार का नौकर,
हर ग्राहक का नौकर है,दुकानदार का नौकर,

वो मेरी उम्र का लड़का,
कभी छुट्टी नहीं पता,

कभी फुर्सत नहीं पाता,
वो मेरी उम्र का लड़का!!

२]-वो मेरी उम्र का लड़का-

घर-घर सुबह जाकर,नए अखबार देता है,
हुआ कल क्या? कहाँ? वो आज समाचार देता है,

वो मेरी उम्र का लड़का,
नहीं मौसम से घबराता,

खबरनामा है ले आता,
वो मेरी उम्र का लड़का!!

३]- वो मेरी उम्र का लड़का-

सुबह गलियों में,ताज़ी सब्जियां,लेकर निकलता है,
कलेजे का लगाकर जोर वो,ठेला बढ़ाता है,

वो मेरी उम्र का लड़का,
सुबह सी ताज़गी लाता,

साँझ सा मुस्कुराता है,
वो मेरी उम्र का लड़का!!

४]- वो मेरी उम्र का लड़का-

कभी स्टेशन,कभी बाज़ार की सड़कों पे दिखता है,
सुबह गांवों से आकर,रात तक रिक्शा चलाता है,

वो मेरी उम्र का लड़का,
हवा से बात करता है,

कभी भी ना ठहरता है,
वो मेरी उम्र का लड़का!!

५]- वो मेरी उम्र का लड़का-

सुबह मजदूर वाली चौक पे,आकर खड़ा होता,
बीमार माँ,भाई-बहिन का,फ़र्ज़ वो ढोता,

वो मेरी उम्र का लड़का,
अभी सपने सजाता है,

अभी भी गुनगुनाता है,
वो मेरी उम्र का लड़का!!

शुभम् श्रीवास्तव ‘ओम’

One Response

  1. शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' Shubham Srivastava 26/04/2013