काश ये दुनिया पहले ही ख़त्म हो जाती

काश ये दुनिया पहले ही ख़त्म हो जाती,
कम से कम ये दरिंदगी तो नहीं आती,
और वो बेक़सूर दामिनी बिना वजह ,
कभी बेमौत यूँ मारी तो नहीं जाती।।

दामिनी की मौत का जीक्र अभी चल ही रहा था,
अभी कितनों का दिल उसके लिए पिघल ही रहा था,
की एक और खबर यूँ उड़ती हुई आई,
की हैवानियत का कहर अभी बरस ही रहा था।।

एक खबर यूँ उड़ती हुई आई,
जिसने सबकी नींदें उड़ायीं,
दरिंदो को ज़रा सी शर्म भी नहीं आई,
और उन्होंने बच्ची के साथ हैवानियत दिखाई।।

एक पाँच साल की गुड़िया हैवानियत का शिकार हो चुकी थी,
दरिंदों के हमले से बीमार हो चुकी थी,
उस मासूम से चेहरे पे बस एक ही सवाल था,
की आखिर उसे किसकी सजा मिली थी।।

दुनिया तो नहीं लेकिन इंसानियत ख़तम हो गयी,
देखते ही देखते हमारी बेटियाँ क्या-क्या सह गयीं,
और यहाँ के लोग बस कानून ही बनाते रह गए,
और न जाने कितनी लड़कियाँ हैवानियत की बलि चढ़ गयीं।।

अब तो कदम बढालो ,कुछ तो फ़र्ज़ निभा दो,
कुर्सी पे लोगों ने बैठाया है तो, उन्हें कुछ तो उसका सिला दो,
बचालो देश की बेटियों को,
और इस हैवानियत को बस मिटा दो।।

हर पल उस दामिनी की चीख सुनाई देगी,
उस पाँच साल की बच्ची की मासूमियत दिखाई देगी,
और तब भी तुम अपने कानून ही बनाते रहना,
तब तक हैवानियत अपना अगला असर दिखा चुकी होगी।।

वो तो हैवान हैं,पर तुम तो इन्सान हो,
लोगों के लिए तो तुम्ही भगवान हो,
एक छोटी सी फ़रियाद उन बेटियों की तरफ से,
की इनके लिए तो तुम्ही इनका सम्मान हो।।

ये बेटियाँ तो देश का सम्मान हैं,
इनका अपमान हमारे देश का अपमान है,
फिर इतनी देर कैसे कर दी तुमने आने में,
क्या अब भी तुम्हारा कानून ही तुम्हारे लिए महान है ……???????

इसीलिए मैं एक गुज़ारिश करती हूँ,
एक छोटी सी सिफारिश करती हूँ,
की या तो ये दरिंदगी मिटा दो,
या सारी बेटियों को मौत की नींद सुला दो।।

क्योंकि हमारे नेता तो बस कानून बनायेंगे,
एक दो बातें होंगी फ़िर कुछ नियम सिखायेंगे,
फिर सारी बातें रफ़ा दफ़ा हो जायेंगी ,
और ये प्य़ार से घर को चले जायेंगे।।

काश छाँव में भी कड़ी धुप हो जाये,
या इंसानियत की कोई नयी राह नजर आये,
ख़तम हो जाये हैवानियत यहाँ से,
या ये दुनिया ही अगले दिन नज़र ना आये।।

5 Comments

  1. devendra devendra 24/04/2013
  2. Neelima 27/04/2013
  3. Onkar Kedia 27/04/2013
  4. वन्दना गुप्ता 27/04/2013
  5. Kailash sharma 27/04/2013

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