न ये बात होती

न बिजली चमकती न बरसात होती ।
न तुम मुस्कुराते न ये बात होती  ।।

न निगाहें ये मिलती न दिल फिर ये जलता
न इशारा मैं करता न जादू ये चलता
न मैं जवाब देता न तुम सवाल करती
न मोहब्बत में हाल यूँ बेहाल करती
न राज तुम बताती न मैं जान पाता
तुम्हें शायद अब तक न पहचान पाता
न पूजा मैं करता न तुम साथ होती
न बिजली चमकती न बरसात होती ।
न तुम मुस्कुराते न ये बात होती ।।

न तुम गजल होती न मेरा गीत होता
न धुन तुम होती न संगीत होता
न तुम नशा होती न मैं शराब होता
न तुम फूल होती न मैं गुलाब होता
न तुम मोर होती न मैं चोर होता
न तुम चाँद होती न मैं चकोर होता
न दिन फिर ये होते न फिर रात होती
न बिजली चमकती न बरसात होती ।
न तुम मुस्कुराते न ये बात होती ।।

न चुप आप रहते न हम बोल पाते
न भेदों के दिल के हम खोल पाते
न आँखों ही आँखों तुम बात करते
न अदायों पर हम यूँ बेमौत मरते
न सुराही सी गर्दन उठ- उठ के उठती
न शराबी शराबी निगाहें ये झुकती
न तुम जीत पाते न हमें मात होती
न बिजली चमकती न बरसात होती ।
न तुम मुस्कुराते न ये बात होती ।।

न ख्वाबों में आकर रोज तुम सताती
न रातों को आकर हमेशा जगाती
न नींदों को मेरी यूँ तुम भगाती
न मोहब्बत के सफ़र में यूँ तुम हराती
न दिल का चैन मेरा यूँ तुम चुराती
न यूँ रुला रुला कर यूँ तुम हंसाती
न मैं यहाँ आता न मुलाकात होती
न बिजली चमकती न बरसात होती ।
न तुम मुस्कुराते न ये बात होती ।।

सुरूर सा अब तो आने लगा है – इंतज़ार अब तड़पाने लगा है,
नशा सा अब तो छाने लगा है – फिर गुस्सा भी आपको आने लगा है I

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गुरचरन मेह्ता

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