खोटा सिक्का…

जख्म दिल का तो हरा होने दे !
आज फिर उसको खफा होने दे !

बेच देना फिर किसी दुश्मन को !
मेरी कीमत तो जरा होने दे !!

बात मेरी भी चलेगी इक दिन !
खोटा सिक्का हूँ खरा होने दे !!

जान लेगा तू कद्र पैसे की !
तेरे बच्चों को बडा होने दे !

मैं फलक पर भी मिलूंगा इक दिन !
तू जमीं पर तो खडा होने दे !!

मयकशी तो छोड दूँगा मैं भी !
उसकी नजरों से जुदा होने दे !!

तू बचा ले ठोकरों से मौला !
“शाद” को फिर से खडा होने दे !! …. प्रदीप अवस्थी “शाद”

2 Comments

  1. Onkar Kedia 20/04/2013
    • pradeep awasthi 20/04/2013

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