कागज, कलम और दिल का रिश्ता

पूछा किसी ने मुझसे,
क्या आज भी तेरी कलम लव्ज पिरोती है,
ऍ दोस्त क्या आज भी बयां होती है कागज पे तेरी जुबां,
मेने हंस के कहा,
ऍ साथी मेरे टूटता ही नहीं दर्द से रिश्ता मेरा,
तो कहो कैसे रहेगी खामोश मेरी जुबां ॥

16 April 2013

4 Comments

  1. devendra devendra 16/04/2013
    • Muskaan 16/04/2013
  2. mahendra gupta 17/04/2013
    • Muskaan 17/04/2013

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