ये वो रंग है जो, बिन पानी के चढ़ जाये !

चाहे कितनी भी दूर जाओ,
मेरी वफ़ा के नगमे सदा साथ रहेंगे !
खुद से तुम सच छुपा भी लो तो,
इश्क से कही न भाग सकोगे !
ये वो रंग है जो, बिन पानी के चढ़ जाये !
तुमसे बिना पूछे, तुम्हे अपने रंग में रंग जाये !

दिल के दरवाज़े, कैसे भी बंद कर लो,
उनपर धडकनों का पहरा कड़ा कर दो,
इस इश्क से फिर भी अजनबी न रह सकोगे,
ये वो रजा है जो, लहू में भी बस जाये !
तुमसे बिना पूछे, तुम्हे तुमसे ही ले जाये !

तुम्हे एहसास भी न होगा,
क्या पाया, क्या खोया है तुमने,
जाने किस घडी ये दिल चुरा ले जाये,
इश्क वो नशा है जो, बिन पिए ही चढ़ जाये !
एक बार जिसे छू ले, वो खुद से ही जुदा हो जाये !

-श्रेया आनंद

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