एक शाम

एक शाम वो भी थी,
जब आबाद हम भी थे!
एक शाम ये भी है,
जब बर्बाद जिंदगी है!

ख़ुशी को आँखों से जाया करते थे,
आज गम को होठो पे सजाते हैं,
लेकर टूटे दिल का दर्द,
महफ़िल में मुस्कुराते हैं!

क्या जानो तुम क्या सिला हुआ,
जाने क्या सिलसिला हुआ,
दर्द हम पे हस्ती और हम,
दर्द से अपना दिल सजाते हैं!

एक रात वो भी थी,
जब ख्वाबो का काफिला था!
एक रात ये भी है,
जहा अश्को का जलजला है!

वो रूठे क्यों हमसे,
ये जानते भी नहीं,
मानते क्या उन्हें,
जो अपने हुए ही नहीं!

दिल के करीब रखकर,
दिल का हिस्सा बना लिया,
दर्द उन्हें क्या दिखाते,
जिनसे दर्द तोहफे में मिला!

एक आलम वो भी था,
जब बात तुमबिन न थी!
एक आलम ये भी है,
जब साथ तुम नहीं!

एक शाम वो भी थी,
जब आबाद हम भी थे!
एक शाम ये भी है,
जब बर्बाद जिंदगी है..

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