उठती ही नहीं पलकें उन्हें बुलाऊं तो कैसे

उठती ही नहीं पलकें उन्हें बुलाऊं तो कैसे,

बेगाना बना लिया हक जताऊं तो कैसे,

सुनके चन्द अफसानों को ही फेर लिए नजर,

रुठा हुआ है यार भला मनाऊं तो कैसे.

 

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