यादें

वक्त दर वक्त या बेवक्त
हर भाव
जो दिल के अन्दर
टूटते-बिखरते
और इससे परेशान
दर्द जब उभरता
मैं फिर टूट जाता
पर चुप रहने भी
नहीं सकता
कुछ लगातार
दौड़ता है अन्दर
और अन्दर
छिपी हुई शिराओं से
दिल की तहों तक …..
उसे क्या कहता
यादें ….तुम्हारी यादें |

सजन कुमार मुरारका

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