जिन्दगी

जिन्दगी के
दस्तूर बड़े निर्जीव
हसंता-रोता खेलता
मौत के ठिकाने
पहुंचने सजीव
इसका तानाबाना
यादों के धागों मे
बुन थमा जाते
कुछ दमकते चिराग
जिस का असर अज़ीब
रोशनी देता मन के
अँधेरे मे,
उज्जाला फैलता
तमस क्षण मे
लिखे गयें
किसी महान
कलाकार के
लेखन मे
कुछ पन्नो मे
जिन्दगी की किताबों से

सजन कुमार मुरारका

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