रपट

आप तो ऐसे ना थे
जरूर कोई बात हुई है
या समझने में कोई भूल हुई है
आप ही बताए,क्या बात है
आपने थाने मे रपट लिखाई है।“
क्या फायदा व्यर्थ ही ऐसे,
पुलिस का अब काम बढ़ाके?
क्यों चाहते हों रपट लिखाना?”
किसी पराये के पास अपना दिल
कंहा मिल जाते,दिल.पता लगाने
यह विडंबन चोरी की बताने
आपने थाने मे व्यर्थ रपट लिखाई है।
जो दिल क्या है जानते नहीं
उनके पास फ़रियाद पहुंचाई है ।”

सजन कुमार मुरारका

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