मिलन

है आसमान
मैं धरती
मिलन प्यासी
सदीयों से भ्रमित
क्षितिज मे
मिलन आश्वासित
जितनी पास जाती
तुम दूर हो जाते
पर जब बरसाते
स्नेह की धारा
पल्लवित आशायें
तुम मेरे आकर्षण मे
बरसाते नयन
मन मे विश्वास
तुम मेरी खोज मे
मंडराते युगों से
आस-पास
और मैं अंकुरित हो जाती

सजन कुमार मुरारका

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