धड़कन के सुर

दिल की धड्कन के राग कैसे कैसे
समझ नहीं आते सुर ,
फिर भी घुल से गए जैसे,
मन मे तरंग मधुर
ताल और झंकार चले ऐसे
वीना मे जागे जैसे सुर
दिल की”यादों” से खूब बनी वैसे
जब प्रेम हो मिलन मजबुर
तब हरी-सी लगती हैं ख्वाहिशें,
सुनाई देता एक शोर
धड्कन दिल की धड़के इसी से
हर वक्त, वक्त बेवक्त दर
ऐसी जैसे कुछ बरस गई बारिशें,
उस अनजानी आहट पर
मन ही मन प्रीत हर्षाये होले से |

सजन कुमार मुरारका

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