प्यार के एहसास

सिमटी कोई लज़्ज़त- जैसे बाँहों में
खामोशी से सीने में रंग भर दे,
वैसे ही सहसा,बिन आहट,
किसी ख़ास लम्हे को पिरोने रंगों मे
हसरत मुहब्बत को सजाने
लरज़ते काँपते दिल की धड़कन से,
माशूक़ के साये से,
हाथों की मेहंदी से
होटों की लाली से
नयन के काज़ल से
गुलाबी चहेरे से
सुनहरे तन से
गहरी नीली आँखों से
काली-काली ज़ुल्फों से
हर रंगों को पाना है
प्यार के एहसास मे जीना है

सजन कुमार मुरारका

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