पाती प्रेम की

शब्द शब्द हैं मुखर
नेह अनुवादों की
अक्षर अक्षर गमक रहा
सुगंध देह की
स्याही महकी यादों की
फ़ैल गई
सुरभि अन्तरमन की
मन बहके
खुशबु सोंधापन की
सजल है नयन
है पाती प्रेम की

सजन कुमार मुरारका

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