प्यार की नज्म

प्यार की नज्म मगर जाने-
क्यूँ लाख कोशिश से भी न लिख पाते हैं ?
लगता है फुल पे मंडराती तितली :
पकड़ते-पकड़ते उंगली से छुट जाती है !

सजन

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