लज़्ज़त- खामोशी

जैसे बाँहों में सिमटी कोई लज़्ज़त-
खामोशी से सीने में रंग भर दे,
वैसे ही सहसा,बिन आहट,
किसी ख़ास लम्हे को शब्दों में पिरोना है |

सजन

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