ग़ौर

ज़ोर नहीं, थोड़ा ग़ौर हम पे,”ढोर” नहीं है समझाने मे,
ज़ाहिर उनके खिलाफ़ ज़ुल्म का शोर नहीं देगें उठाने|

सजन

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