अश्क निकालते हो क्यों उस हरजाई के लिए

अश्क निकालते हो क्यों उस हरजाई के लिए
वो तो मशहुर है महफिल मे बेवफाई के लिए

तारें गीन कर करते हो क्यों अपनी रातें खराब
वह तो ढुढती थी बहाने बस रुसवाइ के लिए

दर्द छुपी है बहुत यहाँ हर रंगिन महफिल मे
आते है सिर्फ यहाँ मिटाने एक तनहाई के लिए

बजारों से उठती नही कभी कोइ कही डोली
क्यों आए हो तुम यहाँ करने सगाई के लिए

लुटते है यहाँ दौलत कोइ, कोइ लुटते है आबरु
आते नही शरिफें यहाँ अपनी लुगाई के लिए

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