रोज याद कर उन्हें गुनहगार हुए हम

रोज याद कर उन्हें गुनहगार हुए हम,

जो सपने में भी याद किए नहीं बेवफा हमें कहतें हैं,

वाह रे वक्त का मसीहा क्या खूब रंग है तेरा,

जो रंगों से दूर रहे कपडे गंन्दे होने की बात करते हैं.

 

 

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