सीख लिया

सीख लिया, सीख लिया;
आखिर मैंने सीख लिया.
अपना ग़म भुला के मैंने,
आँसू छुपाना सीख लिया…!

जबसे तुमको देखा है,
खुद को भूलाना सीख लिया.
हाँ ये सच है मैंने,
आँसू छुपाना सीख लिया…!

जो नाम तुम्हारा जाना है,
अनजान बनना सीख लिया.
हाँ बिल्कुल सच है मैंने,
एक मुस्कान पे मरना सीख लिया…!

मुस्कान तेरी जो देख लिया,
ख्वाब मे रहना सीख लिया.
सच है ये जान, रौशन ने;
तुमपे मरना सीख लिया…!

जब भी ना देखूँ तुमको,
बेकरार होना सीख लिया.
हाँ किसी का, आखिर मैंने;
इन्तजार करना सीख लिया…!

ये तेरा हीं बडप्पन है,
जो इन्सान बनना सीख लिया.
छोटी छोटी बातों में, मैंने;
खुशियाँ ढ़ूँढना सीख लिया…!

ये कैसी बेचैनी है,
जो पगलपन ने जकड़ लिया.
हाँ ये सच है, रौशन ने;
तुमसे प्रेम करना सीखा लिया…!

जब से ये एहसास हूआ है,
इकरार करना सीख लिया.
कमबख्त इश्क़ का, रौशन ने;
इजहार करना सीख लिया…!

5 Comments

  1. mahendra gupta 11/04/2013
  2. Yashwant Mathur 13/04/2013
  3. Onkar Kedia 13/04/2013

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