की दिल अभी बुझा नही

रात गुजर गई सारी चादर मे कोई सलवटें नही
की दिल अभी बुझा नही
नजर मिली बहुत मगर आँखे अभी थका नही
की दिल अभी बुझा नही
देखो शहर होने लगी सपने अभी सजा नही
की दिल अभी बुझा नही
सुहानी रात ढलने लगी चाँद अभी निकला नही
की दिल अभी बुझा नही
बोतल अभी भरी पडी जाम अभी भरा नही
की दिल अभी बुझा नही
शरारते हमने किया कई मिली कोई गिला नही
की दिल अभी बुझा नही
मौशम कितनी रंगीन थी बादल अभी बर्षा नही
की दिल अभी बुझा नही
न सिकवे किए कोई अभी न मिला अभी सजा कोई
की दिल अभी बुझा नही
हड्डी हुई बुढी तो क्या कब्र अभि खुदा नही
की दिल अभी बुझा नही
हरि पौडेल

Leave a Reply