‘कान्हा लालमलाल’ : कुंडलिया

होली रंगों से भरी, कान्हा लालमलाल.

सतरंगी आँचल ढके, राधा मले गुलाल..

राधा मले गुलाल, हर्ष से गले लगाए.

पिचकारी की धार, प्रीति का रस बरसाए.

नत नयनों में लाज, भरे खुशियों की झोली.

भीगा तन-मन आज, देखकर ऐसी होली..

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