‘फुर्र हैं पापड़-गुझिया’: कुंडलिया

गुझिया मीठी रसभरी, टपकाती है प्यार.

पापड़ उसके साथ में, नाचे बीच बजार.

नाचे बीच बजार, झूमती खेले होली.

पकवानों के बीच, मौज हो हँसी-ठिठोली.

चुर्र चुर्र संगीत, बजाते खुरमा-भुजिया.

लेकर रँग गुलाल, फुर्र हैं पापड़-गुझिया..

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