‘जग भरमाया है’: मनहरण घनाक्षरी

गोरी-गोरी बाँकी छोरी, लागे चाँद की चकोरी,

धन्य भाग सासू मोरी, तोहफा पठाया है.

कंचन सी काया तोरी, काहे करे जोरा-जोरी,

मुखड़े को देख गोरी, चंदा भी लजाया है.

धक-धक होवे क्यों री, सूरत सुहानी तोरी,

दिल का भुलावा जो री, खुद को भुलाया है.

पीछे पीछे भागूं गोरी, खेलन को तोसे होरी,

मायाजाल कैसा ओ री, जग भरमाया है..

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