‘खुद ज्ञानवान है’: मनहरण घनाक्षरी

‘सिन्धु’ से ही ‘हिन्दू’ बना, कहते जिसे हैं जाति,
‘हिन्दू’ सुविचारधारा, जाति नहीं, शान है |
सच्चे सारे आदि-ग्रन्थ, जिनमें है रामसेतु,
सच्चे ही हैं धर्मग्रन्थ, सामने प्रमाण है |
तोड़ो नहीं यह सेतु, इसमें अथाह निधि,
कहते हैं साइंटिस्ट, कहता विज्ञान है |
उठा यदि पूरा देश, भग्न होंगें तेरे केश,
दिल में रहेगा क्लेश, खुद ज्ञानवान है ||

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