कहा गयी वो

“मेरी आखों से ये छाला नहीं जाता मौला ,
इनसे तो ख़्वाब भी पाला नहीं जाता मौला ,
बख्श दे अब तो रिहायी मेरे अरमानों को ,
मुझ से ये दर्द संभाला नहीं जाता मौला…!”

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