ऐ निराकार…………

ऐ निराकार

ऐ निराकार      तू  ये  तो  बता,   है तेरा आवास कहाँ |

विदित करा सारे जग को, है पाप कहाँ और नाश कहाँ ||

जिस ठौर भी होगा तू जग में,   मैं देता हूँ सदेश तुझे |

अवलंबन देना प्रभुवर,    जिस पथ में रोके मोह मुझे ||

ऐ निराकार      तू  ये  तो  बता,      है तेरा आवास कहाँ |

भय प्रदान कर निर्भ्य भी कर, पाप पुण्य संग रहते हैं |

व्यसन रोग शोक सब मिलकर, जीवन धार में बहते हैं ||

इस बहाव में ऐ  प्रभुवर तू,   मुझको ऐसा  पतवार बता |

तनिक वार में सब छँट जाएँ, ऐसा गर्वित तलवार बता ||

मिलन हो जिस क्षण तेरा मेरा, ऐसा वह मधुमास कहाँ |

ऐ निराकार तू ये तो बता, है तेरा आवास कहाँ |

ध्रुव को तूने शक्ति दिया था, कंस का सत्यानास किया |

मान दिया गजराज को तूने, रावण का दश शीश लिया ||

कष्ट न दूंगा तूझको भगवन, वही शक्ति मुझमें भर दे |

हर   कौरव  हर  धर्मकंट  को,  मार  सकूँ  ऐसा   वर दे ||

हाथ   पकड़ लूं   मैं   भी  जिसका,    ऐसा तेरा दास कहाँ |

ऐ निराकार तू ये तो बता, है तेरा आवास कहाँ |