तब आयेगी सच्ची होली

नफरत की लाठी टूटेगी -आँखें खोलेगी जनता भोली
तब आयेगी सच्ची होली- तब आयेगी सच्ची होली
जब खेलेंगे हम प्रेम ठिठोली, तब आयेगी सच्ची होली
ब न होंगे बेरोजगार, जब न होगा भ्रष्टाचार
जब न होगा जुर्म कहीं पर, जब न होगा आत्याचार
जब न होगा रंग में भंग फैलाएगा न यहाँ कोई भी झोली
तब आयेगी सच्ची होली- तब आयेगी सच्ची होली
क्या हिन्दू क्या मुसलमान, जब न होगा कत्ले आम
हर दिल में जब होगा राम, दिल बोलेगा एक ही नाम 
बच्चे वैर भाव छोड़ कर, खेलंगे जब आँख-मिचोली 
तब आयेगी सच्ची होली, तब आयेगी सच्ची होली
जब न कोई रावण होगा, जब न चीर हरण होगा
जब आयेंगे कृष्ण धरती पर, जब न कोई दुशासन होगा
पिचकारी से छुटे रंग, चल न जाये कहीं पर गोली 
तब आयेगी सच्ची होली, तब आयेगी सच्ची होली
जब न होगा शिक्षा अभाव, जब भरेगा देश का घाव 
जब न होगा दंगा उत्पात, जब न होगा आत्मघात 
जब न लुटी जायेगी, सरे बाज़ार किसी की डोली
तब आयेगी सच्ची होली, तब आयेगी सच्ची होली
जब न होगा लक्ष्य दीप बुझाना, जब न बनेंगे गरीब निशाना 
जब न आयेगी दर्द बाढ़ की, जब न होगा ताना-बाना 
जब होगा हर दिल में रंग, खेलेंगे सब बन हमजोली
तब आयेगी सच्ची होली, तब आयेगी सच्ची होली
छायेंगी जब घटाएं निराली, भारत होगा वैभवशाली 
नाचेगी हर डाली डाली, चारों ओर होगी खुशहाली 
प्यार के रंग में रंग जायेंगे, सब बोलेंगे प्यार की बोली
तब आयेगी सच्ची होली, तब आयेगी सच्ची होली
नफरत की लाठी टूटेगी -आँखें खोलेगी जनता भोली
तब आयेगी सच्ची होली- तब आयेगी सच्ची होली
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गुरचरन मेहता

 

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