ज़िन्दगी का दूसरा नाम है बहता हुआ पानी

यहाँ एक छोटी सी कहानी लिखी है मैंने,
इस कविता में अपनी जिंदगानी लिखी है मैंने,
हर ख़ुशी कैसे दूर हुई मुघसे,
सब खुद की ज़ुबानी लिखी है मैंने।।

छोटी थी तो किसी बात का गम न था,
हसती खेलती दुनिया थी अपनी और कोई सितम न था,
सबके साथ ये ज़िन्दगी इतनी आगे बढ़ चुकी थी,
की किसी को भी खोने का कोई वहम न था।।

युहीं ज़िन्दगी में एक दिन ऐसा भी आया,
सुबह उठी मैं और खुद को अकेला पाया,
बाहर आई तो देखा की सब रो रहे थे,
और तुम्हे यूँ सबके बीच में सोया देख सब समघ आया।।

जिसे मैं सबसे ज्यादा मानती थी वो दूर जा चूका था,
तब तक तो भगवान को भी खुद पे गुरुर आ चूका था,
खुद को काफी संभाला मैंने और पूछा की ऐसा क्यों हुआ,
तो उसने कहा की काफी रह लिए तुम उसके साथ,अब मुघे भी उसके साथ रहने का सुरूर आ चूका था।।

फिर मैंने कहा की ले अब तू भी क्या याद रखेगा,
मैंने तुघे आबाद किया,तू क्या किसी को आबाद रखेगा,
किसी ऐसे अपने को भेजा है तेरे पास की,
जब वो तुघसे अलग होगा तो तू खुद को भी बरबाद समघेगा।।

कुछ यूँ है बस मेरी ज़िन्दगी की कहानी,
हर ख़ुशी से बिल्कुल बेगानी,
अब ज़िन्दगी का मुघे कोई भरोसा ही नहीं,
क्योंकि इसका दूसरा नाम ही है बहता हुआ पानी।।

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  1. upma 17/09/2013

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