आंख में उगती मूंछें

एक परी की तरह
वह रोज़ रूबरू होती है
धूप और छांव के गोले
पैरों से उड़ाती हुई

देखते-देखते
उसकी रूपहली आंखों में
कड़ी-कड़ी मूंछें उगने लगती हैं
एक औघड़ की तरह
मैं तटस्थ भाव में
अंधेरा ओढ़ लेता हूं

उसकी मूंछें मेरे अंधेरे से
ज़्यादा स्याह हो जाती हैं
एक हिरण की तलाश करने लगता हूं
ताकि अंधेरे से जल्द बाहर निकल सकूं।

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