रंगीन दुनियाँ – यू. के॰ तोमर

इस रंग बिरंगी दुनिया में

हैं रंग बिरंगे लोग यहाँ ।

सुंदर लगती इन लोगों से

हैं ऐसी धरती और कहाँ ।।

कुछ गोरे हैं कुछ काले हैं

कुछ श्याम सलोने लोग यहाँ ।

कुछ रंगी हैं कुछ बेरंगी

कुछ रंग बदलते लोग यहाँ ।।

कुछ के रंग निराले हैं

गोरे होकर भी काले हैं।

कुछ भोले भाले रहते

काले होकर भी लोग यहाँ।।

कुछ हरे हैं कुछ हारे हैं

किस्मत के मारे लोग यहाँ।

कुछ पीले हैं कुछ ढीले हैं

नीले जहरीले लोग यहाँ।

कुछ चुप रहते बस सुनते हैं

कुछ बजा रहे बस गाल यहाँ।

कुछ बात-बात पर हो जाते

हैं नीले पीले लाल यहाँ।।

कुछ ज्ञानी हैं कुछ अज्ञानी

कुछ बिना वजह ही अभिमानी।

गलती तो सब ही करते हैं

कुछ जानबूझ, कुछ नादनी।।

बातें वह सब बेमतलब हैं

जो नहीं दिलों पर असर करें।

सार्थक वह सब बातें हैं,

जो घर कर जाए, जाए जहाँ।।

नर्क वहीं तो होता हैं

नफरत रहती हर वक्त जहाँ।

निस्वार्थ बनो और फिर देखो

स्वर्ग यहीं है और कहाँ।।

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