आज मौसम बहुत आशिकाना है

आज मौसम बहुत आशिकाना  है,

शायद उनकी जुल्फ खुली है जिनसे ये शामियाना है,

चाहत है उन्हें बाहों में प्यार से भर लेने की,

मगर क्या करें दुरियां हैं उसपर ये बैरी जमाना है.

 ःसुहानत ‘शिकन

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