मैं पंछी मतवाला तुमको गीत सुनाता हूँ

मैं पंछी मतवाला तुमको गीत सुनाता हूँ 
के सच्ची बात बताता हूँ
देखता हूँ सब चुप-चुप, छुप-छुप 
और मुस्काता हूँ 
एक दिन देखा था मैंने एक बाबा योग सिखाते
सुबह-सुबह को 4 बजे सोतों को वो थे जगाते
कहते थे कि स्विस बैंक में जाने किसके खाते
रामायण को भूल-भाल नीति का पाठ पढ़ाते
फिर कहते हैं कि मैं तो बस ओषधि बनाता हूँ
देखता हूँ सब चुप-चुप, छुप-छुप
और मुस्काता हूँ
मैं पंछी……
एक दिन देखा सरकारी बाबु का मैंने बँगला
कभी तो दिखती जुली उसमे और कभी थी मंगला
गहनों की भी देखी मैंने एक बड़ी सी श्रुंखला
बंगला नोटों से भरा सब कहते बाबु कंगला
रिश्वतखोरी की बस तुमको झलक दिखाता हूँ
देखता हूँ सब चुप-चुप, छुप-छुप
और मुस्काता हूँ
मैं पंछी……
चोरी हो गयी मेरे घर मैं आया तुमको बताने
गाँव का कल्लू गया था एक दिन थाने रपट लिखाने
थाने में तो पहले खबर थी कौन गया था चुराने
अपना हिस्सा नहीं मिला, थानेदार गया है लाने
हरकतें इनकी देख-देख कर मैं शर्माता हूँ
देखता हूँ सब चुप-चुप, छुप-छुप
और मुस्काता हूँ
मैं पंछी……
एक दिन देखा था मैंने एक नेता जी थे आये
बड़े-बड़े वादे करते थे, कुटिल-कुटिल मुस्काये
भोली-भाली जनता को ये पल भर में बह्कायें
इनकी गहरी चालों में बोलो कैसे न आयें
गा तो नहीं सकता इनके गुण बस गुनगुनाता हूँ
देखता हूँ सब चुप-चुप, छुप-छुप
और मुस्काता हूँ
मैं पंछी……
हरी-हरी सी घांस में जैसे, गढ़ा हो खूंटा सा
जुड़ गया है देश मेरा, जो है अब टूटा सा
यही तो सपना देखा था, जो था अनूठा सा
पर सपना कब सच हुआ है, ये तो रहेगा झूठा सा
काश ये सपना हो जाये सच, दिन गिनता जाता हूँ
देखता हूँ सब चुप-चुप, छुप-छुप
और मुस्काता हूँ
मैं पंछी मतवाला तुमको गीत सुनाता हूँ 
के सच्ची बात बताता हूँ
देखता हूँ सब चुप-चुप, छुप-छुप 
और मुस्काता हूँ 
_______________________________________
गुरचरन मेह्ता

2 Comments

  1. Shiv Nath Kumar 16/03/2013
    • Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 22/03/2013

Leave a Reply