जिस शख्श को सलाम किया है

जिस शख्श को सलाम किया है तमाम उम्र

उसने ही इन्तकाम लिया है तमाम उम्र   ॥

बेशक सजा के आज हम हकदार हैं बहुत

हमने खुदा का नाम लिया है तमाम उम्र ॥

कुछ लोग इस लिये भी नाराज हो गये

गिरतों को हमने थाम लिया है तमाम उम्र॥

हमने तो जिनके वास्ते दी जान हसते हंसते

उसने ही घर नीलाम किया है तमाम  उम्र॥

काजल की कोठरी है इश्क हकीकत में

सबने इसे बदनाम किया है तमाम उम्र ॥

ए “दास” उसके वास्ते सब मय हराम है

जिसने नजर का जाम पिया है तमाम उम्र॥

शिवचरन दास

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  1. Dharmendra Sharma 22/03/2013

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