माँ

ममता की निर्मल काया लिए
वो प्रेम रंग की है छाया
उसकी आँखों में ही जैसे
पूरा ब्रम्हांड है समाया
कुछ कहूँ इस से पहले ही
वो दर्द जान लेती है मेरी
मेरी हर दुआ में शामिल हो कर
वो हर गम बाँट लेती है मेरी
कभी मेरी अश्कों के मोती
अपनी आँखों से वो बरसाती है
कभी मेरी खुशियों में जी कर
साथ मेरे मुस्काती है
सबको दिल से है देती दुआ
ऐसी है प्यारी मेरी माँ – प्रीती श्रीवास्तव

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