क्षणिकाएँ

क्षणिकाएँ ( 2 )

गपलेबाज को पकड़ना
नामुमकिन है श्रीमान
क्योंकि
वह नेताओं के टोले में छुपा है
और
नेताओं के चेहरे में
कुछ फर्क नहीं है श्रीमान

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उन्होंने
कूड़े के ढेर को हटाने का
संकल्प कब लिया था
वो,तो-
कूड़े के ढेर को
सर्वत्र बिखेरने में लगे हैं
ताकि-
कोई इल्जाम ना लगा सके

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मत ढुंढ़ो
कौओं के झुण्ड में
सफेद कौए
क्योंकि –
कुदरत भी उनके साथ लगती है

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आय अर्जन का नया स्त्रोत
कुछ ऐसे बनता है
तू मुझको बेच
मैं तुझे
फिर दोहराए जा
करोड़ो कमाए जा

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लूटो और लूटने दो
जोर से चल रहा है
कारण-
आज उनका है
कल हमारा भी हो सकता है

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