पर रब के पाने का रास्ता वे भूल गये है ….

अमीर अपनी अमीरी के मायने भूल गये है
राह पे चलते मुशफ़िर अपनी राहे भूल गये है
बड़े बड़े नेताओं ने किये थे लम्बे चौड़े वादे
नेता बनने के बाद वे अपने वादे भूल गये है
गरीब तो गरीब होता है,
मगर दिल से वो अमीर होता है
कभी झाक के देखिएगा उनके घरों में , जब वक्त हो आपके पास
हंसी तो दूर की बात है ,
चहरे में मुस्कान की छवि लाना भूल गये है
क्यों हम आखिर इतने खुदगर्ज़ हो चुके है
खुद की अभिलाषा प्राप्ति में दुसरे के लिए हाथ बढाना भूल गये है
क्यों करते है लोग ऐसे वादे और इकरारनामा
जो सिर्फ ग़म का तूफान लाते है गरीबों की ज़िन्दगी में
वो कितने नादाँ होते है जो आपके बातों में खुद को मिटने की ताकत रखते है
उनके हाथ की थाली लेकर आप उन्हें खिलाना भूल गये है
दीन- दुखियों में समर्पित करो खुद को यार ,
खुद के लिए तो पशु मरते है
रब डा वास्ता . एक बार झाकों उनमे ,रब छिपा है उनके अन्दर
ख़ुदा को पाने की तमन्ना तो है अभी भी लोगों में
पर रब के पाने का रास्ता वे भूल गये है ….
♥♥♥शिव कुमार सिंह ♥♥♥

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