एक सदी फिर से नई गुलजार हॉगी

एक सदी फिर से नई गुलजार हॉगी

अर्थ की जिसमे बहुत भरमार  होगी ॥

दोस्ती के वास्ते सब लोग तरसेंगे मगर

हर किसी के हाथ मे तलवार होगी ॥

जब हवाओं मे नमी हो ओर दुआओं मे कमी

वक्त के हाथो समझना हार होगी ॥

सारे चेहरे अजनबी हो जायेंगे वहां

सर बचाने की जहां दरकार होगी ॥

खामोशियों का अर्थ ही आलो्चना होगा अगर

हर किसी से बेवजहा तकरार होगी ।

आदमी होकर खुदा से होड लेगा जो कोई

“दास” उसकी जिन्दगी लाचार होगी ॥

 

 

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