हर कदम पर एक नया शैतान है

जो हमारी पीर से अन्जान है

उसकी मुठठी में हमारी जान है॥

आंख मे आंसू हमारे पांव मे छाले

हर कदम पर एक नया शैतान है॥

वो भला देगा किसी को क्या पनाह

भीख पर खुद पल रहा सुल्तान है॥

दुध पर हर्गिज उसे मत पालिये

सिर्फ डसने का जिसे वरदान है॥

जिन्दगी माना बहुत मुश्किल है दास

मौत  भी लेकिन कहां आसान है॥

मेरे घर के सामने है अस्पताल

और पिछवाडे निरा शमशान है॥

2 Comments

  1. Dharmendra Sharma 11/03/2013

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